उत्तराखंड में वनाग्नि का तांडव, चीड़ की पत्तियाँ बनीं आग की ईंधन!!

उत्तराखंड के अल्मोड़ा, चमोली, पौड़ी और रुद्रप्रयाग सहित कई पहाड़ी जिलों में इन दिनों जंगल की आग गंभीर रूप ले चुकी है।

उत्तराखंड में वनाग्नि का तांडव,  चीड़ की पत्तियाँ बनीं आग की ईंधन!!
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उत्तराखंड के कई पहाड़ी जिलों में इन दिनों जंगलों की आग ने गंभीर रूप ले लिया है। अल्मोड़ा, चमोली, पौड़ी और रुद्रप्रयाग समेत कई इलाकों में वनाग्नि की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। तो वही धारी, ओड़ाखान और क्वारब जैसे क्षेत्रों में भी जंगलों से उठता धुआं स्थानीय लोगों और पर्यावरण के लिए चिंता का कारण बना हुआ है।

आपको बता दे स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं और नागरिकों का कहना है कि इस आग से बांज और चीड़ जैसे महत्वपूर्ण वनों को भारी नुकसान पहुंच रहा है। इसका असर क्षेत्र की जैव विविधता और जल स्रोतों पर भी देखा जा रहा है। आपको बता दे विशेषज्ञों के अनुसार, बढ़ते तापमान, सूखी वनस्पति और कुछ मामलों में मानवीय लापरवाही वनाग्नि की प्रमुख वजहें हो सकती हैं।तो वहीं लगातार बदलते मौसम और जलवायु परिस्थितियाँ भी इस समस्या को और गंभीर बना रही हैं।

इसी बीच,पर्यटन सीजन के चलते पहाड़ी मार्गों पर यातायात का दबाव भी काफी बढ़ गया है।जानकारी के मुताबिक कर्णप्रयाग से श्रीनगर तक कई जगहों पर लंबे जाम की स्थिति बन रही है, जिससे स्थानीय लोगों और यात्रियों दोनों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।जिससे पर्यावरण पर इसका असर अब स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है हवा की गुणवत्ता में गिरावट, तापमान में वृद्धि और जंगलों की पारिस्थितिकी पर गंभीर दबाव।प्रशासन की ओर से आग पर नियंत्रण और निगरानी के प्रयास जारी हैं।

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