चंपावत में शहीद सैनिक परिवार की जमीन पर कथित कब्जे का मामला अब मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सूचना आयोग तक पहुंच गया है। आयोग ने 29 मई को सुनवाई तय कर अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
उत्तराखंड के चंपावत से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।दरअसल, शहीद सैनिक और फौजी परिवार को आवंटित जमीन पर कथित कब्जे के आरोप अब मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर सूचना आयोग तक पहुंच चुके हैं और अब RTI के जरिए कई बड़े खुलासे होने की बात कही जा रही है।
बता दे, मामला पूरणगिरि तहसील क्षेत्र का है जो अब सिर्फ जमीन विवाद नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है, वही पीड़ित परिवार का आरोप है कि उनकी जमीन पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया गया।
परिवार का कहना है कि राजस्व विभाग को पहले ही पैमाइश और कब्जा दिलाने के लिए सरकारी शुल्क जमा कराया गया था…लेकिन कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी और जब राजस्व टीम मौके पर पहुंची तो विरोध और हंगामे के चलते प्रक्रिया अधूरी रह गई।
फिर मामला मुख्यमंत्री कार्यालय तक पहुंचने के बाद प्रशासन हरकत में आया, वही जिलाधिकारी चंपावत ने जांच के निर्देश दिए, जिसके बाद SDM, तहसीलदार और राजस्व टीम को जांच सौंपी गई। इसी बीच RTI के तहत मुख्य सचिव कार्यालय से कार्रवाई की जानकारी मांगी गई, लेकिन आरोप है कि सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई।
जिसके बाद मामला उत्तराखंड सूचना आयोग पहुंच गया…
अब सूचना आयोग ने 29 मई 2026 को सुनवाई तय की है और मुख्य सचिव कार्यालय के लोक सूचना अधिकारी से जवाब भी तलब किया गया है, जिससे प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। अब देखना होगा कि जांच और RTI के बाद इस विवाद में कौन-कौन से नए खुलासे सामने आते हैं…