पाटी, जो कि एक ब्लॉक मुख्यालय भी है और जहां 82 ग्राम पंचायतें आती हैं, वहां आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है—यहां तक कि सार्वजनिक शौचालय और जनप्रतिनिधियों के लिए कार्यालय तक उपलब्ध नहीं है।
चंपावत के पाटी से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा करती है, जहां नवगठित नगर पंचायत के जनप्रतिनिधियों ने सिस्टम की लापरवाही के बीच खुद आगे बढ़कर मिसाल पेश की है। दरअसल, पाटी के मुख्य बाजार में जल निगम द्वारा पाइपलाइन बिछाने के दौरान इंटरलॉकिंग टाइल्स क्षतिग्रस्त हो गई थीं। साथ ही लंबे समय से ये समस्या जस की तस बनी हुई थी, जिससे आम जनता, व्यापारियों और वाहन चालकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
स्थानीय लोगों द्वारा कई बार जल निगम के अधिकारियों से शिकायत और गुहार लगाने के बावजूद भी जब कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो नगर पंचायत पाटी के जनप्रतिनिधियों ने खुद ही जिम्मेदारी उठाई। उन्होंने अपने निजी खर्चे और संसाधनों से सड़क की इंटरलॉकिंग टाइल्स को ठीक करवाने का काम शुरू किया और लोगों को राहत दिलाई। ये कदम जहां एक ओर जनप्रतिनिधियों की सक्रियता को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर सिस्टम की गंभीर लापरवाही को भी उजागर करता है।
आपको बता दें कि पाटी केवल नगर पंचायत ही नहीं बल्कि एक ब्लॉक मुख्यालय भी है, जहां बयासी ग्राम पंचायतें आती हैं। बावजूद इसके, यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव साफ दिखाई देता है—यहां तक कि एक सार्वजनिक शौचालय तक की सुविधा नहीं है।
इतना ही नहीं, नगर पंचायत के चुनाव हुए करीब दो महीने हो चुके हैं, लेकिन अभी तक जनप्रतिनिधियों को बैठने के लिए एक कार्यालय तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन कब जागेगा और पाटी की जनता को उनकी बुनियादी सुविधाएं कब तक मिल पाएंगी।