उत्तराखंड में भाजपा विधायक अरविंद पांडे के नाम से वायरल एक कथित पत्र ने सियासत गरमा दी है। पत्र में सरकार और मुख्यमंत्री पर अनदेखी के आरोपों का दावा किया जा रहा है।
उत्तराखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। दरअसल, भाजपा विधायक अरविंद पांडे के नाम से सोशल मीडिया पर एक कथित पत्र वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। इस वायरल पत्र में दावा किया जा रहा है कि विधायक ने भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री पर अनदेखी के आरोप लगाए हैं। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए मुख्यमंत्री से नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देने की मांग कर डाली। उनका कहना है कि अगर यह पत्र सही साबित होता है, तो यह सरकार के अंदरूनी हालात को उजागर करता है। वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस के इन आरोपों पर भाजपा की तरफ से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई है। उत्तराखंड जलागम परिषद के उपाध्यक्ष शंकर कोरंगा ने पलटवार करते हुए कहा कि आज के डिजिटल दौर में एआई जनरेटेड फोटो, वीडियो और पत्र आसानी से वायरल हो जाते हैं, इसलिए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले इसकी सत्यता की जांच बेहद जरूरी है।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अगर ऐसा कोई वास्तविक पत्र होता, तो पार्टी संगठन निश्चित रूप से उसका संज्ञान लेता। उन्होंने आगे कहा कि इस पूरे मामले पर अंतिम स्थिति खुद अरविंद पांडे ही स्पष्ट कर सकते हैं। उधर, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर लगाए जा रहे आरोपों को खारिज करते हुए कोरंगा ने विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास कोई ठोस मुद्दा नहीं है, जबकि धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड तेजी से विकास की राह पर आगे बढ़ रहा है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह दावा भी किया कि मुख्यमंत्री की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और जनता का समर्थन उनके साथ मजबूती से बना हुआ है।