हल्द्वानी में विशाल भंडारों का आयोजन किया, जगह-जगह श्रद्धालुओं को भोजन, प्रसाद और शरबत वितरित किया गया। जो लोग कैंची धाम नहीं पहुंच सके, उन्होंने भी प्रसाद ग्रहण कर आस्था और सेवा का अनुभव किया।
कैंची धाम स्थापना दिवस पर इस बार प्रशासन ने सड़क किनारे भंडारों के आयोजन पर रोक लगा दी थी। माना जा रहा था कि इससे सालो से सेवा कर रहे श्रद्धालुओं और व्यापारियों की धार्मिक भावनाएं प्रभावित होंगी। लेकिन बाबा नीम करोली महाराज के भक्तों ने साबित कर दिया कि आस्था किसी स्थान की मोहताज नहीं होती। कैंची धाम मार्ग पर भंडारे लगाने की अनुमति नहीं मिली तो श्रद्धालुओं ने हल्द्वानी शहर को ही सेवा और भक्ति का केंद्र बना दिया। दरअसल, शहर के अलग-अलग इलाकों में विशाल भंडारों का आयोजन किया गया, जहां बाबा के भक्त दर्शन के लिए जाने वाले श्रद्धालुओं को भोजन, फल, शरबत और अन्य प्रसाद वितरित कर सेवा का पुण्य अर्जित करते हैं।
वहीं कई ऐसे श्रद्धालु भी इन भंडारों तक पहुंचे जो भारी भीड़, जाम या अन्य कारणों से कैंची धाम नहीं जा सके। ऐसे श्रद्धालुओं ने हल्द्वानी में ही बाबा का प्रसाद ग्रहण कर स्थापना दिवस का हिस्सा बनने का अनुभव साझा किया। भंडारे का आयोजन कर रहे लोगों का कहना है कि बाबा की सेवा किसी एक स्थान तक सीमित नहीं है। बाबा के प्रति यही अटूट विश्वास आज पूरे शहर में भक्ति और सेवा के रूप में दिखाई दिया।