नैनीताल नगर पालिका के सभासद विभिन्न मांगों को लेकर पालिका परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं।
सरोवर नगरी नैनीताल में नगर पालिका प्रशासन के खिलाफ सभासदों का आक्रोश अब सड़क पर उतर आया है। विभिन्न मांगों को लेकर नगर पालिका के तमाम सभासद पालिका परिसर के बाहर धरने पर बैठ गए हैं। तो वही सभासदों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन में अनियमितताएं बढ़ रही हैं और वार्डों की समस्याओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। आपको बता दे नगर पालिका के चुनाव हुए एक साल से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन पालिका अध्यक्ष, प्रशासन और सभासदों के बीच लगातार टकराव की स्थिति बनी हुई है। इसी कड़ी में नगर पालिका के सभी सभासदों ने पालिका परिसर के बाहर टेंट लगाकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है।
आपको बता दे सभासदों का आरोप है कि नगर पालिका प्रशासन में घोर अनियमितताएं हो रही हैं और वार्डों में विकास कार्यों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने पालिका अध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी को 11 सूत्रीय मांग पत्र सौंपते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की। तो वही सभासदों का कहना है कि पूर्व में भी कई बार समस्याओं को लेकर ज्ञापन दिए गए, लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसी वजह से अब उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा है।
वही ज्ञापन में शहर की कूड़ा निस्तारण व्यवस्था को गंभीर समस्या बताया गया है। ओर सभासदों ने आरोप लगाया कि डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन व्यवस्था लगभग ठप हो चुकी है, जबकि नगर की प्रकाश व्यवस्था भी बदहाल स्थिति में है।इसके अलावा बिना बोर्ड बैठक के विभिन्न निविदाएं आमंत्रित किए जाने, करोड़ों रुपये के कूड़ेदानों की खरीद में अनियमितता, 20 लीटर की जगह 17 लीटर के कूड़ेदान बांटने, शत्रु संपत्ति पर अतिक्रमण और उसकी निविदा प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं
जानकारी के मुताबिक सभासदों ने यह भी आरोप लगाया कि पूर्व में लगाए गए विद्युत पोलों पर अब तक तार नहीं लगाए गए हैं। साथ ही सभासद कक्ष उपलब्ध कराने समेत अन्य मांगों को भी प्रमुखता से उठाया गया।धरना प्रदर्शन में सभासद जितेंद्र कुमार पांडे 'जीनू', मनोज जगाती, गजाला कमाल, भगवत रावत, रमेश प्रसाद और अंकित चंद्रा समेत कई वार्डों के सभासद मौजूद रहे। ओर सभासदों ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने कहा कि यदि समस्याओं का जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी नगर पालिका प्रशासन की होगी।