रामनगर की अदालत ने अवैध तमंचा फैक्ट्री मामले में मेहमूद को बरी कर दिया। कोर्ट ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को साबित करने में असफल रहा और जांच में खामियां थीं।
करीब एक साल से ज्यादा समय तक चले हाई-प्रोफाइल केस में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। जिसमे अवैध तमंचा बनाने के आरोप में गिरफ्तार मेहमूद को कोर्ट ने बरी कर दिया है। दरअसल ,रामनगर की अदालत ने करीब 1 साल 2 महीने 17 दिन बाद अपना फैसला सुनाया। जहां अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अभियुक्त मेहमूद को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया। पुलिस का दावा था कि मेहमूद अपने साथी के साथ मिलकर अवैध हथियारों का निर्माण और बिक्री करता था, और उसके पास से तमंचे भी बरामद किए गए थे। लेकिन जैसे-जैसे मामला अदालत में आगे बढ़ा, अभियोजन पक्ष की कहानी कमजोर पड़ती गई।
गवाहों के बयानों में विरोधाभास सामने आए और बरामदगी को लेकर भी सवाल खड़े हुए। साथ ही अदालत में पेश साक्ष्यों में कई अहम बिंदुओं पर स्पष्टता नहीं मिल पाया। वहीं बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने जोरदार पैरवी करते हुए जांच में खामियों को उजागर किया और ये साबित करने की कोशिश की कि केस ठोस सबूतों के बजाय केवल शक और अनुमान पर आधारित है। जिसके बाद कोर्ट ने अपने फैसले में माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में असफल रहा, जिसके आधार पर मेहमूद को बरी कर दिया गया।