कालाढूंगी के आबादी क्षेत्र में खोली गई दो नई शराब की दुकानों के विरोध में स्थानीय लोगों का धरना पांचवें दिन भी जारी रहा। महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए दुकानों को हटाने की मांग की ।
कालाढूंगी के आबादी क्षेत्र में खोली गई दो नई शराब की दुकानों के खिलाफ स्थानीय लोगों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। क्षेत्रवासियों का धरना प्रदर्शन अब पांचवें दिन में प्रवेश कर चुका है और बड़ी संख्या में महिलाएं, बुजुर्ग तथा स्थानीय नागरिक सड़क पर उतरकर प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि आबादी क्षेत्र के बीचों-बीच शराब की दुकानों का संचालन न केवल सामाजिक माहौल को प्रभावित करेगा, बल्कि इससे युवाओं में नशे की प्रवृत्ति भी बढ़ेगी।
धरनास्थल पर जुटी महिलाओं ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए शराब की दुकानों को तत्काल हटाने की मांग की। उनका कहना है कि क्षेत्र पहले से ही नशे की समस्या से जूझ रहा है और ऐसे में नई शराब की दुकानों का खुलना हालात को और गंभीर बना सकता है। महिलाओं ने चिंता जताई कि शराब की दुकानों के कारण क्षेत्र में कानून व्यवस्था प्रभावित हो सकती है तथा महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा पर भी प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
प्रदर्शनकारी महिलाओं का कहना है कि आबादी वाले इलाके में शराब की दुकानों को अनुमति देना प्रशासन की गंभीर चूक है। उनका आरोप है कि स्थानीय लोगों की भावनाओं और आपत्तियों को नजरअंदाज कर दुकानों का संचालन शुरू किया गया है। उन्होंने कहा कि जब तक दुकानों को यहां से हटाया नहीं जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
धरने में शामिल स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जनभावनाओं का सम्मान करते हुए दोनों शराब की दुकानों को आबादी क्षेत्र से बाहर स्थानांतरित किया जाए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि क्षेत्र में स्कूल, आवासीय कॉलोनियां और सार्वजनिक स्थल मौजूद हैं, ऐसे में शराब की दुकानों का संचालन सामाजिक और सांस्कृतिक वातावरण को नुकसान पहुंचा सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि प्रशासन जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लेता है तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में बड़े स्तर पर जन आंदोलन चलाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। फिलहाल कालाढूंगी में शराब की दुकानों को लेकर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी है और क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। अब सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है कि वह स्थानीय लोगों की मांगों पर क्या फैसला लेता है।