मीठी लीची के पीछे छिपा कड़वा सच!

चकलुवा इलाका अपनी स्वादिष्ट लीची के लिए देश-विदेश में पहचान बना रहा है। यहां की लीची किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बनती है, लेकिन मंडी और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी बड़ी चुनौती है।

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नैनीताल जिले की लीची की मिठास देश-विदेश तक पहुंच रही है, वही इस मिठास के पीछे किसानों की कई अनसुनी परेशानियां भी छिपी हैं।  दरअसल, नैनीताल जिले के कालाढूंगी विधानसभा का चकलुवा क्षेत्र अपनी रसीली और स्वादिष्ट लीची के लिए पूरे देश में पहचान बना चुका है। यहां की लीची बड़े शहरों की मंडियों के साथ-साथ विदेशों तक भी पहुंच रही है। बता दें कि हर साल लीची की फसल हजारों किसानों की आय का प्रमुख जरिया बनती है और पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति देती है। हालांकि, लीची की इस सफलता के बावजूद यहां के किसान कई मूलभूत सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं।जानकारी के मुताबिक, प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नारायण दत्त तिवारी ने इस क्षेत्र को "फल पट्टी" के रूप में विकसित करने की पहल की थी, लेकिन आज भी कई जरूरी सुविधाएं यहां नहीं पहुंच पाई हैं। जिनमे से सबसे बड़ी समस्या स्थानीय फल मंडी की कमी है, मंडी न होने के कारण किसानों को अपनी उपज बिचौलियों के माध्यम से बेचनी पड़ती है, जिससे उन्हें उचित दाम नहीं मिल पाता। वहीं सिंचाई की पर्याप्त व्यवस्था न होने से भी बागवानों को हर साल परेशानियों का सामना करना पड़ता है और उत्पादन प्रभावित होता है। बता दे किसानों का कहना है कि यदि यहां आधुनिक फल मंडी, कोल्ड स्टोरेज, पैकिंग सेंटर और बेहतर सिंचाई सुविधाएं विकसित की जाएं, तो चकलुवा की लीची अंतरराष्ट्रीय बाजार में और मजबूत पहचान बना सकती है। साथ ही उनका मानना है कि सरकार यदि इस फल क्षेत्र पर विशेष ध्यान दे, तो यह इलाका उत्तराखंड की बागवानी अर्थव्यवस्था का एक बड़ा केंद्र बन सकता है।

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