रामनगर IMPCL के निजीकरण के विरोध में चल रहे आंदोलन को अबसा माजिक संगठनों का भी समर्थन मिलने लगा है। करणी सेना उत्तराखंड और अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा ने कर्मचारियों के समर्थन में निजीकरण पर सवाल उठाए
रामनगर स्थित आईएमपीसीएल के निजीकरण के खिलाफ चल रहा आंदोलन अब और मजबूत होता नजर आ रहा है। जहां कर्मचारियों के समर्थन में अब सामाजिक संगठन भी खुलकर सामने आ गए हैं। बता दे,करणी सेना उत्तराखंड और अखिल ब्राह्मण उत्थान महासभा ने आंदोलनरत कर्मचारियों को अपना समर्थन दिया है। वही मोहान स्थित IMPCL परिसर में पहुंचे दोनों संगठनों के प्रतिनिधियों ने कर्मचारियों से मुलाकात की और निजीकरण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि भारत सरकार के निवेश एवं लोक संपत्ति प्रबंधन विभाग यानी डीपम द्वारा निगम को 121 करोड़ रुपये में बेचने का निर्णय लिया गया है, जबकि हाल ही में कराई गई वैल्यूएशन में संस्थान की कीमत करीब 191 करोड़ रुपये आंकी गई है। संगठनों का कहना है कि इस फैसले से सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो सकता है। साथ ही निजीकरण का असर कर्मचारियों और क्षेत्र के रोजगार पर भी पड़ेगा। उनका मानना है कि इससे पलायन जैसी समस्याएं और बढ़ सकती हैं। दरअसल, करणी सेना उत्तराखंड की संरक्षक अमिता लोहानी ने मांग की कि निजीकरण प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही संगठनों ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने कर्मचारियों और स्थानीय जनता की मांगों को नजरअंदाज किया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।