रामनगर के जस्सागांजा क्षेत्र में डंपरों की आवाजाही के विरोध में 20 दिनों से चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन प्रशासन के आश्वासन के बाद समाप्त हो गया।
रामनगर के जस्सागांजा क्षेत्र में डंपरों की आवाजाही के विरोध में पिछले 20 दिनों से चल रहा ग्रामीणों का आंदोलन आखिरकार खत्म हो गया।दरअसल, यहां ग्रामीण पिछले 20 दिनों से डंपरों की अनियंत्रित आवाजाही, जर्जर सड़क, उड़ती धूल और बढ़ते हादसों के विरोध में धरना दे रहे थे। साथ ही पिछले 48 घंटों से कई महिलाएं भूख हड़ताल पर बैठी थीं, जिससे प्रशासन पर समाधान निकालने का दबाव बढ़ गया।
वही रविवार को SDM गोपाल सिंह चौहान, सीओ अमित कुमार, कोतवाल सुशील कुमार और अन्य अधिकारियों ने धरना स्थल पहुंचकर ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के साथ लंबी वार्ता की। बैठक में कई महत्वपूर्ण मांगों पर सहमति बनी।
प्रशासन ने स्पष्ट किया कि खनन कार्य पूरी तरह बंद करना संभव नहीं है क्योंकि इससे हजारों लोगों की आजीविका जुड़ी है। लेकिन ग्रामीणों की समस्याओं को देखते हुए सड़क के गड्ढे तत्काल भरने, नियमित पानी का छिड़काव कराने और करीब 70 लाख रुपये की लागत से सड़क मरम्मत का प्रस्ताव तैयार करने का भरोसा दिया गया।
साथ ही सुबह 6 से 9 बजे, दोपहर 12 से 3 बजे और शाम 6 से 10 बजे तक डंपरों के संचालन पर रोक लगाने का फैसला लिया गया, ताकि स्कूली बच्चों और स्थानीय लोगों की आवाजाही सुरक्षित रहे। आदेश का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।इसके अलावा 12 टायर से बड़े डंपरों के प्रवेश पर रोक लगाने, पुलिस चौकी निर्माण की प्रक्रिया तेज करने और कालूशिद्ध गेट को स्थायी रूप से स्थानांतरित करने का प्रस्ताव भी जिलाधिकारी को भेजा जाएगा।