उत्तराखंड सरकार ने राज्यभर के मदरसों की गतिविधियों, फंडिंग, छात्रों की उपस्थिति और सरकारी योजनाओं की जांच के आदेश दिए हैं। अनियमितता मिलने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
उत्तराखंड में अब मदरसों की हर गतिविधि सरकार की रडार पर होगी… कौन पढ़ रहा है? पैसा कहां से आ रहा है? योजनाओं का लाभ किसे मिल रहा है? अब हर सवाल का जवाब देना होगा, क्योंकि सरकार ने राज्यभर के मदरसों की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। पहले तो आपको बता दे, मदरसे यानि Madrasa एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ 'शिक्षा का स्थान' या पाठशाला है, जो मुख्य रूप से इस्लामिक धार्मिक और पारंपरिक शिक्षा केंद्र होते हैं।
चलिए बात करते है मुद्दे की जहां शासन ने सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए मदरसों की रोज़ाना गतिविधियां, बच्चों की मौजूदगी, पीएम पोषण योजना समेत दूसरी सरकारी योजनाओं और फंडिंग के स्रोतों की जांच की जाएगी। वही सरकार साफ कर चुकी है कि अगर जांच में किसी भी तरह की अनियमितता सामने आती है तो संबंधित मदरसे के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बता दे, राज्य में इस समय कुल 452 मदरसे संचालित हैं, जिनमें 400 मदरसे 1st से 8th तक और 52 मदरसे 9th से 12th तक की पढ़ाई कराते हैं।
दरअसल मैदानी जिलों में दूसरे राज्यों से बच्चों को लाकर पढ़ाने की शिकायतों ने शासन की चिंता बढ़ा दी थी। इसी के चलते पहले ऊधम सिंह नगर, हरिद्वार, नैनीताल और देहरादून जिलों में विशेष जांच के निर्देश दिए गए थे। वहीं अब पीएम पोषण योजना समेत अन्य योजनाओं में गड़बड़ी की शिकायतों के बाद जांच का दायरा और बढ़ा दिया गया है। इतना ही नहीं, सरकार ने ये भी साफ कर दिया है कि 1 जुलाई 2026 से उत्तराखंड मदरसा बोर्ड का अस्तित्व खत्म हो जाएगा। इसके बाद सभी अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थान नए अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में आएंगे। साथ ही मदरसों को शिक्षा बोर्ड से संबद्धता लेना भी अनिवार्य होगा।