सौ साल से अधिक समय पहले कुमाऊं क्षेत्र के चंपावत की जिन पहाड़ियों पर बसे गांवों में बाघ की दहाड़ से दहशत फैल जाती थी, आज वही रास्ते देश और विश्व के पर्यटकों के लिए रोमांच का नया ठिकाना बनने जा रहे हैं
सौ साल से अधिक समय पहले कुमाऊं क्षेत्र के चंपावत (Champawat) की जिन पहाड़ियों पर बसे गांवों में बाघ की दहाड़ से दहशत फैल जाती थी, आज वही रास्ते देश और विश्व के पर्यटकों के लिए रोमांच का नया ठिकाना बनने जा रहे हैं।
चंपावत जिले के जिन क्षेत्रों में विश्व प्रसिद्ध शिकारी और फिर संरक्षणवादी बने जिम कार्बेट (Jim Corbett) ने वर्ष 1907 से 1938 तक खतरनाक अभियानों को अंजाम दिया था उन्हें ट्रेल (Trail) के रूप में विकसित किया जा रहा है।नाम दिया गया है जिम कार्बेट टेल | सरकार ने प्रथम चरण में इन ट्रेल के साथ ही वहां पर्यटक सुविधाएं विकसित करने के लिए चार करोड़ रुपये जारी किए हैं। इन ट्रेल से जहां पर्यटक रोमांच का अनुभव करेंगे, वहीं स्थानीय निवासियों के लिए आजीविका के अवसर भी सृजित होंगे। जिम कार्बेट ने एक दौर में चंपावत क्षेत्र में सक्रिय आदमखोर बाघ (Man eating Tiger) व गुलदार ढेर कर स्थानीय निवासियों को राहत दिलाई थी। चंपावत के विभिन्न गांवों में 436 व्यक्तियों को शिकार बनाने वाले आदमखोर बाघ को कार्बेट ने वर्ष 1907 में ढेर किया था | बड़े क्षेत्र की खाक छानने के बाद उन्हें इसमें सफलता मिली थी।