देहरादून में RTI के जरिए 30 पीजी विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्तियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। दस्तावेजों में कई डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन अपूर्ण या परीक्षणाधीन बताए गए हैं, जिसके बाद जांच की मांग तेज हो गई।
देहरादून से स्वास्थ्य विभाग से जुड़ा एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां 30 पीजी विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्तियों पर सवाल खड़े हो गए हैं। आपको बतादे की सूचना के अधिकार यानी आरटीआई के तहत सामने आए दस्तावेजों ने स्वास्थ्य विभाग और शासन की कार्यप्रणाली को जांच के घेरे में ला दिया है। वही आरटीआई कार्यकर्ता चंद्रशेखर जोशी द्वारा प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार, शासन ने मार्च 2026 में 30 पीजी चिकित्सकों की तैनाती के आदेश जारी किए थे। लेकिन बाद में सामने आए अभिलेखों में खुलासा हुआ कि इनमें से 16 चिकित्सकों के पीजी रजिस्ट्रेशन मामले “अनुत्तीर्ण”, अपूर्ण या परीक्षणाधीन स्थिति में थे। वहीं Uttarakhand Medical Council ने आरटीआई के जवाब में साफ किया है कि राज्य में चिकित्सा सेवा देने और विशेषज्ञ डॉक्टर के रूप में कार्य करने के लिए वैध यूएमसी पंजीकरण अनिवार्य है। अब सवाल यह उठ रहा है कि जब नियम स्पष्ट थे, तो अपूर्ण पंजीकरण वाले डॉक्टरों की तैनाती किस आधार पर की गई। जिसके बाद मामले को लेकर उच्चस्तरीय जांच की मांग तेज हो गई है। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग नियुक्ति फाइलों और दस्तावेजों की दोबारा जांच में जुटे हुए हैं।