उत्तराखंड में मतदाता सूची पुनर्निरीक्षण से पहले मस्जिदों में लोगों को पुराने दस्तावेज तैयार रखने की अपील की जा रही है। वहीं डेमोग्राफी और फर्जी वोटरों को लेकर सियासी हलचल भी तेज हो गई है।
उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष पुनर्निरीक्षण यानी SIR को लेकर अब माहौल पूरी तरह सक्रिय नजर आने लगा है। आने वाले हफ्तों में शुरू होने वाली इस प्रक्रिया से पहले राज्य के कई इलाकों की मस्जिदों में सूचना पट्ट और पोस्टर लगाए गए हैं। इन पोस्टरों के जरिए लोगों से अपील की जा रही है कि वे अपने पुराने दस्तावेज, यहां तक कि 40 साल पुराने कागजात भी पहले से तैयार रखें, ताकि सत्यापन के दौरान किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
दरअसल, इस अभियान का उद्देश्य मतदाताओं की पहचान और निवास से जुड़े दस्तावेजों को समय रहते व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। साथ ही जमीयत उलेमा ए हिंद के कार्यकर्ता भी मस्जिदों के माध्यम से लोगों की सहायता करते दिखाई दे रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, राज्य में डेमोग्राफी चेंज और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर चर्चाएं लगातार तेज हैं। जानकारी के मुताबिक, कई ऐसे नाम भी सामने आए हैं जो सूची में दर्ज हैं, लेकिन संबंधित स्थानों पर मौजूद नहीं पाए गए।
इसी बीच, राजनीतिक दल भी पूरी तैयारी में जुट गए हैं। कांग्रेस मुस्लिम मतदाताओं तक अपनी पहुंच मजबूत करने में लगी है, जबकि भाजपा ने अपने बूथ लेवल अधिकारियों को मैदान में उतार दिया है। बताया जा रहा है कि ये अधिकारी नए और गायब मतदाताओं की पहचान करने में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।