कुमाऊं कमिश्नर ने हीरानगर स्थित ‘निर्वाण’ नशा उन्मूलन एवं पुनर्वास केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के उन्होंने मौके पर ही CMO को केंद्र का लाइसेंस निरस्त करने के निर्देश दिए।
कमिश्नर दीपक रावत (Commissioner Deepak Rawat) ने हीरानगर स्थित ‘निर्वाण’ नशा उन्मूलन एवं पुनर्वास केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कई गंभीर खामियां उजागर होने पर उन्होंने मौके पर ही CMO को केंद्र का लाइसेंस निरस्त (license canceled) करने की कार्रवाई करने के निर्देश दिए |
जांच में पाया गया कि निर्धारित गाइडलाइन के अनुसार केवल नशे के आदी व्यक्तियों को ही नशा मुक्ति केंद्र में रखा जा सकता है, लेकिन यहां ऐसे मरीजों को भी भर्ती किया गया जो नशे के आदी नहीं थे और अन्य बीमारियों से ग्रसित थे। कमिश्नर ने इसे गंभीर उल्लंघन करार देते हुए सख्त नाराजगी जताई। इसके अतिरिक्त बिना अनुमति महिला मरीजों को भी केंद्र में रखे जाने का मामला सामने आया जबकि केंद्र को केवल पुरुषों के उपचार की स्वीकृति प्रदान की गई है। निरीक्षण के दौरान ये भी सामने आया कि शासन स्तर से केंद्र को 30 मरीजों के निशुल्क उपचार की अनुमति है लेकिन पंजिका में 30 से अधिक मरीजों का उपचार दर्ज पाया गया। कई मरीजों के नाम उपस्थिति रजिस्टर में अंकित भी नहीं थे। कमिश्नर ने चिकित्सा विभाग (Medical Department) के अधिकारियों को फटकार लगाते हुए क्षेत्र में संचालित अन्य नशा मुक्ति केंद्रों की नियमित जांच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए साथ ही केंद्र में लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों का पिछले 15 दिनों का फुटेज उपलब्ध कराने को कहा। नियमों के अनुसार प्रत्येक नशा मुक्ति केंद्र में मानसिक चिकित्सक, फिजिशियन और मेडिकल ऑफिसर की अनिवार्य तैनाती आवश्यक है, लेकिन निरीक्षण में पाया गया कि केंद्र में केवल एक मानसिक चिकित्सक तैनात है और वो भी नियमित रूप से उपस्थित नहीं रहते। इसके अलावा कई मरीजों के आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य मूल दस्तावेज केंद्र में रखे जाने का मामला भी सामने आया। कमिश्नर ने इसे कानूनी अपराध बताते हुए स्पष्ट किया कि मरीज के केंद्र छोड़ने के बाद उसके मूल दस्तावेज अपने पास रखना अवैध है।