सुप्रीम कोर्ट ने बनभूलपुरा दंगा केस में आरोपियों की जमानत रद्द कर दी। कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर सवाल उठाते हुए दो हफ्ते में सरेंडर का आदेश दिया।
4 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में उत्तराखंड के चर्चित बनभूलपुरा दंगा मामले पर अहम सुनवाई हुई, जिसमें कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए दो मुख्य आरोपियों की जमानत रद्द कर दी।
दरअसल, राज्य सरकार ने नैनीताल हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत दी गई थी।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि हाईकोर्ट इस केस का सही आकलन नहीं कर पाया। कोर्ट ने साफ कहा कि यह बेहद गंभीर घटना थी, जिसमें आगजनी, पथराव और पुलिस पर हमला जैसे संगीन अपराध शामिल थे। यहां तक कि पुलिस स्टेशन को भी आग के हवाले कर दिया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी की कार्रवाई को भी सराहा और कहा कि जांच तेज़ी से और सही दिशा में की गई। साथ ही कोर्ट ने यह भी माना कि हाईकोर्ट ने जांच प्रक्रिया को लेकर गलत टिप्पणियां की थीं।
इसके अलावा कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपियों ने समय रहते आदेश को चुनौती नहीं दी, जिससे उनका जमानत पाने का अधिकार कमजोर पड़ गया।
इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का आदेश रद्द करते हुए आरोपियों को दो हफ्ते के भीतर ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
इस फैसले को राज्य सरकार के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है, वहीं पुलिस विभाग का मनोबल भी इससे काफी बढ़ा है।