नैनीताल में औचक निरीक्षण के दौरान कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत को कई विभागों में भारी लापरवाही मिली। वर्षों से लंबित मामलों और अधूरे रिकॉर्ड पर अधिकारियों को फटकार लगाई गई।
नैनीताल में प्रशासनिक व्यवस्थाओं की हकीकत उस वक्त सामने आ गई, जब कुमाऊं आयुक्त एवं मुख्यमंत्री के सचिव दीपक रावत ने एसडीएम कार्यालय, तहसील कार्यालय और निबंधन कार्यालय का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान कई विभागों में लापरवाही, अधूरे रिकॉर्ड और वर्षों से लंबित मामलों को लेकर अधिकारियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।
निरीक्षण के दौरान आयुक्त ने पाया कि धारा 229-बी के कई राजस्व मामले पिछले 15 से 20 वर्षों से लंबित पड़े हैं। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए निर्देश दिए कि पुराने मामलों में बार-बार तारीख देने के बजाय हर सप्ताह सुनवाई कर जल्द निस्तारण सुनिश्चित किया जाए।
वहीं संपत्ति बंटवारे से जुड़े मामलों में आदेश जारी होने के बावजूद पटवारियों द्वारा ‘कुर्रे’ दाखिल न किए जाने पर भी उन्होंने सख्त रुख अपनाया। इसके अलावा धारा 143 से संबंधित आवेदनों की समीक्षा के दौरान रिकॉर्ड सही ढंग से न रखने और मामलों की जानकारी न होने पर संबंधित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करने और प्रतिकूल प्रविष्टि देने के निर्देश दिए गए।
इतना ही नहीं, सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रजिस्ट्री दस्तावेजों के रखरखाव में अनियमितताएं मिलने पर भी आयुक्त ने अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने साफ कहा कि जनहित से जुड़े मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और सभी लंबित प्रकरणों का जल्द समाधान सुनिश्चित किया जाए।