नैनीताल की लोअर मॉलरोड पर उपचार स्थल के आगे नई दरारें उभरने से सुरक्षा को लेकर फिर चिंता बढ़ गई है। 2018 में झील में समाए हिस्से का स्थायी समाधान अब तक पूरा नहीं हो पाया है।
नैनीताल की पहचान मानी जाने वाली लोअर मॉलरोड एक बार फिर खतरे की जद में दिखाई दे रही है। जिस सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से का स्थायी उपचार पिछले कई सालों से चल रहा है, अब उसी उपचार स्थल के आगे नई दरारें उभरने लगी हैं। दरअसल, साल 2018 में लोअर मॉलरोड का करीब 25 मीटर हिस्सा झील में समा गया था। इसके बाद 3 करोड़ 48 लाख रुपये की लागत से स्थायी उपचार का काम शुरू किया गया। लेकिन तकनीकी दिक्कतों और निर्माण में लगातार देरी के चलते यह परियोजना आज तक पूरी नहीं हो सकी।
हाल ही में व्यापार मंडल के विरोध के बाद कुमाऊं आयुक्त ने मौके का निरीक्षण किया था और कार्य में तेजी लाने के साथ-साथ सीसीटीवी निगरानी के निर्देश भी दिए थे। इसके बाद निर्माण कार्य ने रफ्तार तो पकड़ी, लेकिन अब उपचार स्थल के आगे सड़क पर नई दरारें दिखाई देने लगी हैं, जिसने एक बार फिर सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बता दे, लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता के अनुसार, करीब 330 मीटर क्षेत्र का एनएचपीसी से सर्वे कराया गया है और पूरे हिस्से के स्थायी समाधान के लिए डीपीआर तैयार की जा रही है। फिलहाल एहतियात के तौर पर सड़क पर उभरी दरारों को भरने का काम किया जाएगा। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस बार नैनीताल की इस अहम सड़क का स्थायी समाधान समय पर हो पाएगा?