हल्द्वानी के दमुवाढूंगा रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में कथित धोखाधड़ी का खुलासा, बिल्डर धनंजय गिरी और Punjab National Bank की भूमिका पर सवाल।
हल्द्वानी। उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (Uttarakhand Real Estate Regulatory Authority – RERA) और उसके अपीलीय न्यायाधिकरण के हालिया फैसले ने हल्द्वानी के दमुवाढूंगा क्षेत्र में चल रहे एक बड़े रियल एस्टेट प्रोजेक्ट में कथित धोखाधड़ी का खुलासा कर दिया है। इस मामले में बिल्डर धनंजय गिरी और राष्ट्रीयकृत बैंक Punjab National Bank की भूमिका पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।
जानकारी के अनुसार, गुरमीत सिंह, पूर्व पीसीएस अधिकारी बीएल फिरमाल, डॉ. जेएल फिरमाल सहित कई खरीदारों ने दमुवाढूंगा स्थित प्रोजेक्ट में लाखों रुपये देकर फ्लैट बुक किए थे। रजिस्टर्ड एग्रीमेंट होने के बावजूद न तो निर्माण पूरा हुआ और न ही तय समय पर कब्जा मिला।
आरोप है कि वर्ष 2018 में बिल्डर ने उसी जमीन की दोबारा रजिस्ट्री दिखाकर लगभग 10 करोड़ रुपये का लोन Punjab National Bank से प्राप्त कर लिया, जबकि फ्लैट पहले ही खरीदारों के नाम एग्रीमेंट हो चुके थे। पीड़ितों का कहना है कि बिना उनकी लिखित सहमति के लोन स्वीकृत किया गया, जो नियमों के विपरीत है।
जब बिल्डर ने लोन चुकाया नहीं, तो बैंक ने खाते को एनपीए घोषित कर दिया और जमीन की नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी। इससे खरीदारों के वैध अधिकार खतरे में पड़ गए। पीड़ितों ने Uttarakhand RERA का दरवाजा खटखटाया।
RERA ने पहले नीलामी पर रोक लगाते हुए खरीदारों को कब्जा दिलाने का आदेश दिया। हालांकि बैंक की अपील पर अपीलीय न्यायाधिकरण ने शर्तों के साथ नीलामी की अनुमति दी है। आदेश के अनुसार:
नीलामी विज्ञापन में स्पष्ट करना होगा कि पुराने खरीदारों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे।
जो भी नई संस्था या व्यक्ति जमीन खरीदेगा, उसे “नया प्रमोटर” माना जाएगा।
नए प्रमोटर को पुराने खरीदारों को फ्लैट उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी निभानी होगी।
पीड़ितों का आरोप है कि बैंक के कुछ उच्च अधिकारियों की कथित मिलीभगत से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन स्वीकृत किया गया। RERA ट्रिब्यूनल ने 26 फरवरी को बैंक को 15 दिन में नीलामी का प्रारूप प्रस्तुत करने का आदेश दिया था, लेकिन एक माह बीतने के बाद भी अनुपालन नहीं हुआ।
यह मामला न केवल हल्द्वानी बल्कि पूरे उत्तराखंड में घर खरीदारों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर बहस खड़ी कर रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह केवल बिल्डर की धोखाधड़ी है, या बैंक अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी।