रामनगर पर्यटकों की कमी से जूझ रहा कॉर्बेट फीस और बुकिंग बनी वजह

जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क में पर्यटकों की कमी, 2025-26 में घटे सैलानी और राजस्व। महंगी सफारी, बुकिंग दिक्कतें और नए पर्यटन स्थलों की बढ़ती लोकप्रियता बनी वजह।

रामनगर पर्यटकों की कमी से जूझ रहा कॉर्बेट फीस और बुकिंग बनी वजह
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देश के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में शुमार जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क इस बार पर्यटकों की कमी से जूझता नजर आ रहा है। हर साल लाखों सैलानियों से गुलजार रहने वाला कॉर्बेट इस वित्तीय वर्ष में कम भीड़ और घटते राजस्व के चलते चर्चा में है।

पार्क प्रशासन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में कुल 4 लाख 946 पर्यटक ही कॉर्बेट पहुंचे, जिनमें करीब 3.89 लाख भारतीय और 10,949 विदेशी पर्यटक शामिल हैं। पर्यटन से होने वाली आय भी घटकर लगभग 27 करोड़ 75 लाख रुपये रह गई है।

अगर पिछले वर्ष 2024-25 के आंकड़ों से तुलना करें, तो तब 4.59 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचे थे। यानी इस बार करीब 58 हजार सैलानी कम आए, जिसका सीधा असर राजस्व पर पड़ा है।

विशेषज्ञों के मुताबिक, सफारी शुल्क में बढ़ोतरी इसका एक बड़ा कारण है, जिससे मध्यम वर्ग के पर्यटक प्रभावित हुए हैं। इसके अलावा ऑनलाइन बुकिंग में आ रही दिक्कतें, खासकर लोकप्रिय जोनों में समय पर स्लॉट न मिलना भी पर्यटकों को निराश कर रहा है।

वहीं सीताबनी और फाटो जैसे नए पर्यटन क्षेत्रों का बढ़ता आकर्षण भी कॉर्बेट के लिए चुनौती बनता जा रहा है। यहां आसान बुकिंग, बेहतर टाइगर साइटिंग और नाइट स्टे जैसी सुविधाएं पर्यटकों को अपनी ओर खींच रही हैं।

जानकारों का मानना है कि कॉर्बेट के पारंपरिक पर्यटन ढांचे को मजबूत बनाए रखने के लिए बेहतर मैनेजमेंट, पारदर्शी बुकिंग सिस्टम और सभी जोनों के बीच संतुलन जरूरी है। वरना आने वाले समय में इसकी रौनक और कम हो सकती है।

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