उत्तराखंड हाईकोर्ट ने छात्रा की संदिग्ध मौत मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा। परिवार ने रैगिंग और पुलिस की लापरवाही का आरोप लगाया, 28 अप्रैल तक जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश।
उत्तराखंड हाईकोर्ट में एक छात्रा की संदिग्ध मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है।
दरअसल, गुरुवार को न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने इस मामले में सुनवाई की।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से सख्त सवाल किया कि स्वजन की शिकायत के बावजूद एफआईआर दर्ज क्यों नहीं की गई, जिसके चलते परिजनों को लखनऊ में जीरो एफआईआर दर्ज करनी पड़ी।
इसके साथ ही कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिए हैं कि 28 अप्रैल तक इस मामले में जांच रिपोर्ट पेश की जाए,
और अगली सुनवाई की तारीख भी 28 अप्रैल तय कर दी गई है।
वहीं, इस मामले में छात्रा के पिता राम कृष्ण तोमर ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है,
और अपनी बेटी की मौत की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
याचिका के अनुसार, उन्होंने अपनी 18 वर्षीय बेटी का दाखिला ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी भीमताल में कराया था, जहां वह छात्रावास में रहती थी।
हालांकि, पिता का आरोप है कि उनकी बेटी ने कई बार फोन पर बताया था कि कुछ सीनियर छात्र उसकी रैगिंग कर रहे थे, जिससे वह काफी परेशान रहती थी।
इसी बीच, 30 जुलाई 2025 को कॉलेज की ओर से सूचना दी गई कि छात्रा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। बताया गया कि उसे बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया,
जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन, जब परिजनों ने भवाली कोतवाली में शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की, तो आरोप है कि कॉलेज के दबाव में पुलिस ने मामला दर्ज करने से इनकार कर दिया।
इसके बाद, परिजनों ने लखनऊ में जीरो एफआईआर दर्ज कराई, और वहां की पुलिस ने जांच के लिए मामला भवाली थाने को भेजा।
फिलहाल, आरोप है कि अब तक स्थानीय पुलिस ने जांच शुरू नहीं की है,
जिसे लेकर परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है।