उत्तराखंड... जेल की सलाखों के पीछे प्रधान, तो फिर कैसे लाखों का भुगतान ? विधायक बेहड़ का बड़ा खुलासा !

ऊधमसिंहनगर के किच्छा की दरऊ ग्राम पंचायत की जेल में बंद प्रधान नाजिया बी पर आरोप है कि उनके डिजिटल सिग्नेचर (DSC) का दुरुपयोग कर लाखों रुपये का भुगतान कराया गया। खुलासा विधायक तिलकराज बेहड़ ने किया।

उत्तराखंड... जेल की सलाखों के पीछे प्रधान, तो फिर कैसे लाखों का भुगतान ? विधायक बेहड़ का बड़ा खुलासा !
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रुद्रपुर: ऊधमसिंहनगर के किच्छा की ग्राम पंचायत दरऊ की प्रधान नाजिया बी पर आरोप है कि जेल में बंद रहने के बावजूद उनके डिजिटल सिग्नेचर (DSC) का दुरुपयोग कर लाखों रुपये का भुगतान कराया गया। इस मामले का खुलासा किच्छा विधायक तिलकराज बेहड़ ने किया है।

विधायक बेहड़ के अनुसार, नाजिया बी 13 दिसंबर 2025 से धोखाधड़ी के मामले में पौड़ी जेल में बंद हैं। इसके बावजूद 30 दिसंबर 2025 से 24 फरवरी 2026 के बीच 14 बिलों के माध्यम से कुल 10,39,535 रुपये का भुगतान उनके डिजिटल सिग्नेचर से किया गया।

भुगतान की तिथियों में 30 दिसंबर को 28,000 रुपये, 5 जनवरी को 10,500 रुपये, 7 जनवरी को 11,655 रुपये, 14 जनवरी को तीन भुगतानों में 1,53,537, 1,86,641 और 1,72,483 रुपये, 3 फरवरी को 88,129, 2,14,750 और 10,580 रुपये, 17 फरवरी को 11,700 और 7,060 रुपये तथा 24 फरवरी को 46,500, 49,500 और 49,500 रुपये शामिल हैं।

विधायक ने आरोप लगाया कि दो फरवरी को नाजिया बी के नाम से एक कथित पत्र तैयार कर उनके पति गफ्फार खां को प्रतिनिधि नियुक्त दिखाया गया और इसी आधार पर भुगतान कराए गए। उनका कहना है कि जेल जाने के बाद डिजिटल सिग्नेचर तुरंत निरस्त होना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया, जिससे अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध लग रही है।

विधायक बेहड़ ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के भीतर कार्रवाई नहीं हुई तो वे जिलाधिकारी कार्यालय में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।

इस पूरे मामले में ब्लॉक स्तर से लेकर उच्च स्तर तक के अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की आवश्यकता जताई गई है। नाजिया बी के खिलाफ पहले भी धोखाधड़ी और गैंगस्टर एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हैं।

सीडीओ दिवेश शाशनी ने बताया कि दरऊ ग्राम पंचायत का प्रकरण संज्ञान में आया है। डीएससी का प्रयोग किसी और व्यक्ति द्वारा नहीं किया जा सकता। इस मामले में डीपीआरओ को तीन दिन में जांच रिपोर्ट देने के आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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