उत्तराखंड में वनाग्नि ने फिर डर बढ़ा दिया है। देवप्रयाग समेत कई वन क्षेत्रों में आग भड़कने से हाई अलर्ट जारी है। Pushkar Singh Dhami के निर्देश पर जंगलों में नमी बनाए रखने की नई रणनीति तैयार की जा रही
उत्तराखंड में बढ़ती गर्मी और तेज हवाओं के बीच वनाग्नि ने एक बार फिर विकराल रूप लेना शुरू कर दिया है। राज्य के कई वन प्रभाग हाई अलर्ट पर हैं, जबकि देवप्रयाग के बाह बाजार क्षेत्र से सामने आई आग की घटना ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। यहां जंगल में लगी भीषण आग रिहायशी इलाकों तक पहुंच गई, जिसके बाद एहतियातन केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर को खाली कराना पड़ा।
बताया जा रहा है कि जंगल में लगी आग ने तेज हवाओं के कारण अचानक विकराल रूप ले लिया। देखते ही देखते आग की लपटें आबादी वाले क्षेत्रों तक पहुंचने लगीं, जिससे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। धुएं के गुबार और आग की ऊंची लपटों के चलते स्थानीय लोगों में दहशत फैल गई।
स्थिति को गंभीर देखते हुए प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई करते हुए केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के रघुनाथ कीर्ति परिसर को खाली कराया, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
वन विभाग और दमकल विभाग की टीमों को आग बुझाने में भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। क्षेत्र दुर्गम और ढालदार होने के कारण दमकल वाहनों और कर्मचारियों को मौके तक पहुंचने में दिक्कत हुई। वहीं तेज हवाओं ने आग को तेजी से फैलाने का काम किया।
कई घंटों की लगातार मशक्कत के बाद देर रात आग पर किसी तरह काबू पाया जा सका। फिलहाल इलाके में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि आग दोबारा न भड़क सके।
वनाग्नि का असर अब वन्यजीवों पर भी साफ दिखाई देने लगा है। जंगलों में आग लगने के बाद गुलदार समेत कई जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। इसके अलावा कई जगह घायल पक्षियों और छोटे वन्यजीवों के मिलने की घटनाएं भी सामने आई हैं।
वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ती गर्मी और जंगलों में सूखी वनस्पति आग को तेजी से फैलाने का बड़ा कारण बन रही है।
वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 15 फरवरी से 21 मई तक उत्तराखंड में वनाग्नि की कुल 337 घटनाएं दर्ज की गई हैं। इन घटनाओं में करीब 283 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ है। कई इलाकों में जंगलों की जैव विविधता और पर्यावरण को भी नुकसान पहुंचा है।
वनाग्नि की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के निर्देश पर जंगलों में चाल-खाल और वाटर होल विकसित करने की नई रणनीति तैयार की जा रही है। इसका उद्देश्य जंगलों में नमी बनाए रखना और आग की घटनाओं पर शुरुआती स्तर पर ही नियंत्रण पाना है।
सरकार का कहना है कि आने वाले दिनों में वन विभाग, आपदा प्रबंधन और स्थानीय प्रशासन के बीच समन्वय बढ़ाकर वनाग्नि की घटनाओं से प्रभावी तरीके से निपटा जाएगा।